कोरोना में छूटी नौकरी, हौसले ने रची सफलता की नई कहानी

कोरोना में छूटी नौकरी, हौसले ने रची सफलता की नई कहानी

सागर 25 जनवरी 2026 
कहते हैं कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां उम्मीदें टूटती नजर आती हैं, लेकिन वहीं से सफलता की नई राह भी निकलती है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सागर के 28 वर्षीय दिव्यांश खत्री की, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलकर न सिर्फ अपना भविष्य संवारा, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दिया। दिव्यांश खत्री को बचपन से ही बड़े-बड़े फाइव स्टार होटलों में काम करने का सपना था। इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद जयपुर से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें गोवा के एक फाइव स्टार होटल में नौकरी मिल गई। वहां उन्हें सालाना करीब 5 लाख रुपये का पैकेज मिला, जिससे उनका सपना साकार होता दिख रहा था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। नौकरी शुरू होने के महज दो महीने बाद ही देश में कोरोना महामारी फैल गई। लॉकडाउन लगते ही होटल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई और मंदी के चलते कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी। इसी दौरान दिव्यांश को भी नौकरी से निकाल दिया गया। मजबूरी में वे सागर लौट आए। अगले दो साल उनके लिए बेहद कठिन रहे। बेरोजगारी, भविष्य की चिंता और खर्चों का दबाव उन्हें लगातार मानसिक तनाव में डालता रहा। इसी बीच दिव्यांश ने बाजार की जरूरत को समझा। उन्होंने देखा कि खाद्य पदार्थों, खासकर ब्रेड और बिस्कुट की मांग लगातार बनी रहती है। साथ ही यह भी महसूस किया कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश उत्पाद मैदे से बने होते हैं, जिनका सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। यहीं से उनके मन में गेहूं से बने हेल्दी ब्रेड और बिस्कुट तैयार करने का विचार आया।

दिव्यांश ने यूट्यूब के माध्यम से गेहूं से ब्रेड, बिस्कुट और पाव जैसे उत्पाद बनाने की तकनीक सीखी। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी, क्योंकि मशीनरी काफी महंगी थी। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि भारत सरकार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन और सब्सिडी प्रदान कर रही है। उन्होंने सागर के उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया, जहां उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के बारे में जानकारी मिली।
योजना के तहत दिव्यांश ने लोन के लिए आवेदन किया और उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। आज दिव्यांश का फूड प्रोसेसिंग प्लांट सफलतापूर्वक चल रहा है, जहां 10 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। उनकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। उनके द्वारा तैयार किए जा रहे गेहूं से बने ब्रेड, बिस्कुट और पाव की स्थानीय बाजार में काफी मांग है।

दिव्यांश खत्री कहते हैं कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वे खुद की कंपनी खोलेंगे और दूसरों को रोजगार देने वाले बनेंगे। उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है कि सही सोच, मेहनत और सरकारी योजनाओं की जानकारी से बेरोजगारी को भी सफलता में बदला जा सकता है।

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