गर्भवती माताओं, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं (HRPW) की करें विशेष निगरानी
गर्भवती माताओं, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं (HRPW) की करें विशेष निगरानी
ड्यूटी आवर में निजी प्रैक्टिस पर कार्रवाई के निर्देश
एएनसी समय पर हो, किशोरियों को किया जाए जागरूक
कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में दिए कड़े एवं महत्वपूर्ण निर्देश
सागर 23 जनवरी 2026
कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने निर्देश दिए कि मातृ मृत्यु दर को शून्य पर लाने के लक्ष्य के साथ निर्देश दिए कि इनकी स्पेशल ट्रैकिंग करते हुए जितनी भी हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं (High-Risk Pregnant Women) चिन्हित की गईं हैं, उनकी सूची बीएमओ (BMO) के पास अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। ऐसी महिलाओं की एएनएम और आशा कार्यकर्ता विशेष निगरानी करें। किसी भी आपात स्थिति में उन्हें बिना देरी के उच्च स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया जाए।
उन्होंने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं का एएनसी (ANC) समय पर किया जाए, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ड्यूटी आवर के दौरान किसी भी शासकीय चिकित्सक द्वारा निजी प्रैक्टिस करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों एवं स्टाफ की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में आयुष्मान भारत योजना, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव तथा मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि आम नागरिकों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक उपकरण, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, साफ-सफाई तथा मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के निर्देश दिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
हर नागरिक का हो डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड: 'आभा' आईडी
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक व्यक्ति की 'आभा आईडी' बनाई जाए। इससे मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास (पुरानी बीमारियां, जांच रिपोर्ट, दवाएं) डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। मरीज को भारी-भरकम फाइलें लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर डॉक्टर को इलाज करने में आसानी होगी। इससे स्क्रीनिंग में भी मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को भी निर्देशित किया कि वे हर बच्चे की आभा आईडी बनना सुनिश्चित करेंगे।
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