आने वाले दिनों में तेज गर्मी मे रहे सावधान
आने वाले दिनों में तेज गर्मी मे रहे सावधान
सागर 10 मई 2026
गर्मियों में तेज धूप, पसीने और दूषित पानी-भोजन के कारण कई बीमारियाँ होती हैं, जिनमें लू लगना (Heat Stroke), डिहाइड्रेशन, फूड पॉइजनिंग, टॉयफाइड,घमौरियां और पीलिया प्रमुख हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए भरपूर पानी पीना, बासी भोजन से बचना और दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचना जरूरी है।
लू लगना (Heat Stroke): धूप में लू लगने पर तेज बुखार ( 104 degree) , सिर दर्द , बदन दर्द, उल्टी, चक्कर एवं बेहोशी आ सकती है अतः दोपहर 12 से 3-4 बजे तक बहुत आवश्यक होने पर ही बाहर निकले..शरीर को पूरा ढक लेने से sun burn एवं Heat stroke से बच सकते हैं
डीहाइड्रेशन :- होने पर शरीर में पानी और नमक की कमी के कारण सरदर्द, कमजोरी एवं थकान हो जाती है जिसके लिए कोल्ड ड्रिंक्स की जगह नीबू पानी ,मठा ,लस्सी ,आम का पना ,गन्ने का रस,बेल का शरबत ,शिकंजी , नारियल पानी, ओआरएस का इस्तेमाल करना चाहिये..
घमौरियां और सनबर्न (Heat Rashes & Sunburn): हल्के रंग के सूती , ढीले कपड़े उपयोग करने से Heat rashes ( घमोरियाँ : पसीने से त्वचा पर लाल दाने ) से बच सकते हैं
फ़ूड पॉइज़निंग एवं पेट संक्रमण :
गर्मी के मौसम में भोजन जल्दी ख़राब हो जाता है..अतः बासा भोजन ना करें.. बाहर के कटे फल ना लें, तला भोजन ना लेकर हल्का- फुल्का ,जल्दी पचने वाला सादा भोजन लें..ताजे फल एवं सब्ज़ियाँ एवं तरल पदार्थ ज़्यादा इस्तेमाल करें.
टायफाइड और पीलिया :-गर्मी में दूषित पानी एवं भोजन से उल्टी, दस्त , पीलिया एवं टाइफ़ॉयड की संभावना ज़्यादा होती है।
वायरल फीवर और खसरा (Chicken Pox & Measles):-गर्मी में चिकन पॉक्स एवं अन्य वॉयरल इन्फेक्शन ज़्यादा होने के कारण सावधानी जरूरी है.
मच्छर जनित रोग :- ठहरा हुआ पानी और नम मौसम मच्छरों के प्रजनन में सहायक होते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
AC का तापमान 24-26 डिग्री पर रखें, ठण्डे कमरे से एकदम धूप में बाहर निकलने से बीपी लो हो सकता है एवं लू लग सकती है
बीपी एवं हार्ट के मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि - गर्मी में पसीना ज़्यादा निकलता है |पसीने से शरीर का पानी एवं नमक निकल जाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है , बीपी कम हो जाता है एवं खून गाढ़ा हो जाता है । खून गाढ़ा होने से खून में थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है..जिससे हार्ट अटैक एवं लकवा होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
गर्मी के मौसम में डॉयबिटीज़ के मरीज़ों को भी सावधान रहना चाहिये, क्योंकि गर्मी में इन्सुलिन ख़राब होने/ असर कम होने की संभावना रहती है अतः इन्सुलिन को फ़्रिज में या कूल बेग में रखें..साथ ही ग्लूकोमीटर की रीडिंग भी ग़लत आ सकती है।
गर्मी के मौसम में संक्रमण की बीमारियाँ अधिक होती हैं जिनसे बचना जरूरी है.. साथ ही बीपी , हार्ट एवं लकवा के मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
डॉ॰राजेन्द्र चउदा.(एम.डी.) डॉ॰ध्रुव चउदा. (एम.डी.)
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