भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण कार्यों से बदली एरण के गुप्तकालीन स्मारकों की तस्वीर
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण कार्यों से बदली एरण के गुप्तकालीन स्मारकों की तस्वीर सागर 16 जनवरी 2026 दो-तीन वर्ष पूर्व तक देश के अत्यंत महत्वपूर्ण गुप्तकालीन पुरास्थल एरण के स्मारक उपेक्षा और संरक्षण के अभाव में लगभग वीरान पड़े थे। बिना नदी के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल का गौरव धूल, काई और क्षरण में दबता जा रहा था। वराह प्रतिमा, विष्णु प्रतिमा और गरुड़ध्वज स्तंभ उपेक्षित अवस्था में थे, जबकि नृसिंह प्रतिमा तीन हिस्सों में टूटी पड़ी थी। सती स्तंभ जंगल में खंडित अवस्था में पड़ा था। इन सभी स्मारकों का उल्लेख सर्वप्रथम अलेक्जेंडर कनिंघम ने वर्ष 1874दृ75 में किया था। हालांकि, पिछले दो वर्षों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), जबलपुर मंडल द्वारा किए गए संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों ने एरण की तस्वीर ही बदल दी है। एरण महोत्सव के दौरान अब देशदृप्रदेश से आए पर्यटक, शोधार्थी और इतिहासप्रेमी इन स्मारकों की भूरिदृभूरि प्रशंसा कर रहे हैं। सती स्तंभ का पुनरुद्धार पुरातात्विक स्थल एरण से लगभग एक किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में पहलाजपुर ग्राम के पास स्थित सती स्तंभ वर्षों से उपेक्षित था। यहाँ तक ...